श्री राम चरणामृत

श्री राम चरणामृत

दैहिक, दैविक, भौतिक तापा, रामराज्य नहिं कोहहु व्यापा-
रामचरितमानस में रामराज्य के वर्णन में यही कहा गया है कि रामराज्य में किसी भी प्राणी को दैहिक (शारिरिक ),दैविक (प्राकृतिक) भौतिक (भौतिक संसाधनों से उत्पन्न या आर्थिक किसी भी प्रकार का कोई भी कष्ट नहीं था )
इसका मतलब यदि आज भी हम इन तीनो क्षेत्रों पर ध्यान दें तो स्थिति को काफी सुधारा जा सकता है ।
इसलिए हम रोजगार, खेल-कूद को बढ़ावा तथा पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रेरित हैं।